देहरादून, राज्य की सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून को आइडियल अस्पतालों के रूप में देखते हुए यहां पर तमाम व्यवस्थाओं को चुस्त और दुरुस्त किया गया था, यहां आधुनिक व्यवस्थाएं की गई थी लेकिन कुछ समय के बाद ही यहां की व्यवस्थाएं दम तोड़ती हुई दिखाई दे रही है। आलम यह है कि मरीज के लगाई गई लिफ्ट अधिकतर खराब ही रहती है, अस्पताल की O T बिल्डिंग के पांचवे माले पर जाने वाला व्यक्ति को पहुंचाना किसी टेढ़ी खीर से काम नहीं लेकिन अधिकारियों और व्यवस्था बनाने वाले मुलाजिमों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता ।। अस्पताल सरकारी है तो व्यवस्थाएं भी ऐसी ही मिलेगी, मानो जैसे यहां देखने वाला तो कोई है ।। लोगों को खुद रगड़ रगड़ कर सीढ़ियों से चढ़कर पांचवी माले तक पहुंचना होता है।।जिससे किसी को मानो जैसे कोई फर्क ही नहीं पढ़ता। अस्पताल में लगी दो लिफ्ट में से एक पूरी तरह खराब है तो दूसरी लिफ्ट के उपकरण और समान ढोया जाता है ऐसी सिस्टम के सामने मरीज इंतजार के सिवा कर भी क्या सकता है यह सवाल यक्ष खड़ा है।
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