देहरादून नगर निगम न सिर्फ उत्तराखंड का सबसे बड़ा नगर निगम है बल्कि यह निगम अक्सर भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर सवालों के कटघरे में खड़ा रहता है। देहरादून नगर निगम पर एकबार फिर बड़े घोटाले का आरोप लगा है, दरअसल, मामला राजधानी के इंद्रापुरम वार्ड का है जहां एक सड़क जिसे नये सिरे से बनाया जाना था उसे महज़ कागाज़ों में पूरा दिखाकर नगर निगम प्रबंधन से उसके निर्माण का भुगतान करवा दिया गया। यही नहीं मौके पर सड़क निर्माण का बोर्ड भी लगाकर यह दर्शाने की कोशिश की गयी कि इस सड़क का निर्माण हो चुका है। आरोपों के अनुसार बोर्ड में इसकी निर्माण तिथि 2024-2025 दर्शायी गई है जिसमें सड़क और नाली निर्माण का कार्य पूरा होने का जिक्र किया गया है। तो वहीं मात्र कागजी कार्रवाई की सत्यता के आधार पर नगर निगम प्रबंधन द्वारा इसका लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान भी हो गया।
इस पूरे मामले की परतें तब खुली, जब नए पार्षद और निगम के लोक निर्माण अनुभाग से क्षेत्रवासियों ने सड़क नहीं बनने को लेकर जवाब मांगा, तो वहीं अब नगर निगम क्षेत्र में सड़क नहीं बनने के बाद भुगतान होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रावधान के तहत भुगतान से पहले साइट विजिट की जाती है और इसके बाद इंजीनियरों की ओर से काम की प्रगति को लेकर रिपोर्ट दी जाती है। इस मामले में इंजीनियरों की ओर से लापरवाही क्यों बरती गई, इसे लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं।
आयुक्त ने भेजा नोटिस
नगर आयुक्त देहरादून नमामी बंसल का कहना है कि स्थानीय लोगों और पार्षद की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी। संबंधित अनुभाग से विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। ठेकेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि विभागीय स्तर से लापरवाही हुई होगी तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
