देहरादून। उत्तराखंड के आबकारी विभाग में अधिकारियों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करना भी मुश्किल हो रहा है। ताजा मामला चमोली जनपद का है, जहां जिला अधिकारी संदीप तिवारी ने जिला आबकारी अधिकारी दुर्गेश्वर त्रिपाठी पर कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद आबकारी अधिकारी ने एक पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया कि किस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
कार्रवाई के बाद नाराजगी
चमोली के जिला आबकारी अधिकारी पर की गई कार्रवाई से पूरे आबकारी विभाग में असंतोष की लहर है। त्रिपाठी ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया कि वे अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अनुचित रूप से निशाना बनाया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने नहीं दिया जा रहा है, जिससे वे मानसिक दबाव में आ गए हैं।
कर्मचारियों का रोष और कार्य बहिष्कार की चेतावनी
इस घटना के बाद आबकारी महकमे के कर्मचारी एकजुट हो गए हैं और कार्य बहिष्कार की योजना बना रहे हैं। विभाग के विभिन्न कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर अधिकारियों के साथ इसी तरह का व्यवहार किया जाता रहा, तो वे विभागीय कार्य को जारी नहीं रख पाएंगे। कर्मचारियों का मानना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य आबकारी विभाग को दबाव में लाना है, जिससे अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम न कर सकें।
सरकार और उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग
इस मामले के बाद अब सरकार और उच्च अधिकारियों पर भी दबाव बढ़ रहा है। आबकारी विभाग के कर्मचारियों ने मांग की है कि इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का माहौल दिया जाए।आबकारी कर्मचारी संगठनों का कहना है कि विभाग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें अवैध शराब की रोकथाम, राजस्व संग्रह और अन्य प्रशासनिक कार्य शामिल हैं। ऐसे में यदि अधिकारियों पर इस प्रकार का दबाव डाला जाएगा, तो यह पूरी व्यवस्था के लिए नुकसानदायक होगा।अगर इस मामले में जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विवाद और गहरा सकता है। आबकारी विभाग का कार्य प्रभावित होने से राजस्व हानि हो सकती है और अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई में भी बाधा आ सकती है।सरकार के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन सकती है, क्योंकि यदि आबकारी विभाग के कर्मचारी आंदोलन पर उतरते हैं, तो इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी और सरकार इस मामले को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं और कर्मचारियों की मांगों को किस तरह से पूरा किया जाता है।
