रविवार को देहरादून में आयोजित उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती उत्सव में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय व राज्य मंत्रिगण और सभी सांसद-विधायक मौजूद रहे, वहीं पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी कार्यक्रम से पूरी तरह नदारद रहे। इतने महत्वपूर्ण मौके पर सांसद बलूनी का ना पहुंचा चर्चाओं का विषय बना रहा। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा कई बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट, 38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन, प्रदेश सरकार के तीन साल पूरे होने पर आयोजित वृहद कार्यक्रम जैसे बड़े आयोजन शामिल है। हर बड़े आयोजन में नेताओं, कैबिनेट, कार्यकर्ताओं और जनता की उपस्थिति दर्ज हुई, लेकिन पौड़ी संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद अक्सर तस्वीर से गायब रहे। लोगों के बीच तो अब यह तंज भी चल पड़ा है कि “बलूनी जी के लिए पूरा उत्तराखंड दिल्ली में ही बसता है”, इसलिए कार्यक्रम भी वहीं करवाते हैं और पहाड़ की राजनीति भी वहीं बैठकर करते हैं। पहाड़ के नाम पर ट्वीट और प्रेस नोट नियमित होते हैं, लेकिन जनता के बीच उपस्थिति प्रायः अनियमित। इतना ही नहीं, बार-बार अनुपस्थिति ने अब यह सवाल सीधे जनता के बीच खड़ा कर दिया है कि क्या प्रतिनिधित्व केवल कागज़ पर होना काफी है या जमीनी उपस्थिति भी आवश्यक है? रजत जयंती जैसे ऐतिहासिक कार्यक्रम में 1.50 लाख से अधिक लोग शामिल हुए संवेदनशीलता, भावनात्मक जुड़ाव और जनभागीदारी का यह ऐसा दृश्य था जो बरसों याद रखा जाएगा। लेकिन उसी भीड़ में पोड़ी का सांसद कहीं दिखाई न दिया और यही बात पूरे मुद्दे को और ज्यादा स्पष्ट और ज्यादा बोलती हुई बना देती है।

