उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद भी नैनीताल जिले की एक महिला को उसके पति ने गैर-कानूनी तरीके से तलाक दे दिया, जिससे पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है. पीड़िता ने पति पर लंबे समय से घरेलू उत्पीड़न, मारपीट, जान से मारने की धमकी देने और सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणियां कर बदनाम करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. यूसीसी के तहत तलाक की प्रक्रिया सख्त है, जिसमें समान आधार जैसे व्यभिचार, क्रूरता या परित्याग पर ही अनुमति मिलती है, लेकिन पति ने एकतरफा और बिना कानूनी प्रक्रिया के तलाक का ऐलान कर दिया।
महिला ने इस मामले में एसएसपी नैनीताल को शिकायत दर्ज कराई, साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य उच्च अधिकारियों तक अपनी गुहार लगाई है. पुलिस ने पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जो यूसीसी के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही है. नैनीताल में यूसीसी के एक साल में 43,872 विवाह पंजीकृत हुए, जबकि 29 तलाक आवेदनों में से 27 को मंजूरी मिली, लेकिन ऐसे गैर-कानूनी मामले महिलाओं की सुरक्षा को चुनौती दे रहे हैं. यह घटना राज्य सरकार के लिए बड़ी परीक्षा बन गई है, क्योंकि यूसीसी का मकसद ही लिंग समानता और एकसमान कानून सुनिश्चित करना था. पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए ताकि अन्य महिलाएं ऐसी हिंसा से बच सकें।
पति की मारपीट और सोशल मीडिया पर बदनामी
हल्द्वानी की नई बस्ती ताज मस्जिद वार्ड-26 निवासी आयशा ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को शिकायती पत्र देकर बताया कि आठ साल पहले कालाढूंगी के मुस्तजर फारूकी से उसका विवाह हुआ था, लेकिन शादी के बाद से ही पति का व्यवहार अमानवीय रहा. वह लगातार गाली-गलौच, शराब के नशे में मारपीट करता रहा और कालाढूंगी व हल्द्वानी में कई बार गंभीर हिंसा की, जिसके कारण पहले भी थानों में मुकदमे दर्ज हुए थे, फिर भी सुधार नहीं आया. सबसे गंभीर बात यह है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बावजूद पति ने कई बार गैर-कानूनी तरीके से तलाक दे दिया और धमकी दी कि वह बड़ा पत्रकार है तथा शासन-प्रशासन में उसकी अच्छी पकड़ है।
आयशा ने आरोप लगाया कि मुस्तजर इंटरनेट मीडिया पर अभद्र-अश्लील पोस्ट डालकर उसे और उसके परिवार को मानसिक रूप से तोड़ रहा है, जिससे वह गहरे डिप्रेशन में चली गई है. पीड़िता ने एसएसपी से मांग की है कि पति के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज हो और उसे परिवार सहित सुरक्षा दी जाए, साथ ही प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, महिला आयोग व कुमाऊं कमिश्नर को भी शिकायत भेजी. तहरीर पर पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर ली है, जो यूसीसी कानून की कमजोरी को उजागर कर रही है. यह मामला महिलाओं की सुरक्षा और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, क्योंकि यूसीसी का उद्देश्य ही एकसमान न्याय सुनिश्चित करना था।
