उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदू प्रवेश निषेध की मांग को लेकर अब सियासी रंग भी गहराने लगा है, विपक्ष ने सत्ताधारी भापजा पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार का घेराव किया। दरअसल, उत्तराखंडस में बद्री-केदार मंदिर समिति के अधीन 48 अन्य मंदिर भी हैं, जबकि गंगोत्री धाम और यमनोत्री धाम के लिए अलग-अलग समिति गठित है। जहां बीते दिनों पहले ही बद्री-केदार मंदिर समिति ने बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम समेत अपने अधिकार में आने वाले सभी 48 मंदिरों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही थी, तो वहीं अब गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
सबसे पहले गैर हिंदू प्रवेश निषेध की मांग गंगा सभा हरिद्वार ने उठाई थी, जिसके बाद हर की पैड़ी समेत आसपास के घाटो में भी गैर हिंदू प्रवेश निषेध के बोर्ड भी नजर आए, वहीं अब इस मुद्दे पर सियासत भी शुरु हो चुकी है। इस क्रम में विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार देश को बांटने का काम कर रही है गैर हिंदू में सिख, बौद्ध ,जैन समेत कई धर्म के लोग आते हैं। जबकि सिख,जैन और बौद्ध लोगों में भी सनातन धर्म के प्रति आस्था होती है और वह भी मंदिर में जाते हैं।
वक्फ बोर्ड ने किया फैसले का स्वागत
बद्री-केदार मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह निर्णय मात्र उनका नहीं है बल्कि अलग-अलग समितियों द्वारा यह मांग उठाई गई, तब जाकर समिति ने यह फैसला लिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उत्तराखंड में लैंड जिहाद,थूक जिहाद जैसे मामले समाने आए हैं लिहाजा उन्हें देखते हुए इस मांग पर निर्णय लिया जाएगा। हेमंत द्विवेदी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि सिख ,बौद्ध और जैन धर्म हिंदू धर्म में ही आते हैं।
उधर उत्तराखंड क बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भी हिंदू धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदू प्रवेश निषेध फैसले का स्वागत किया है।। उनका कहना है कि जिन लोगों में सनातन धर्म के प्रति आस्था है वह मंदिर में जा सकते हैं और यह प्रक्रिया सालों साल से चली आ रही है.. तो किसी को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्य धर्म के तमाम स्थानों पर भी इस तरह की व्यवस्था रहती हैं ऐसे में यदि देवभूमि उत्तराखंड जैसी जगह पर आस्था से संबंधित और मंदिरों में गैर हिंदू के प्रवेश पर रोक लगाती है तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
