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विपक्षी दल के प्रभावशाली नेता का चहेता शर्मा हल्द्वानी में शराब कारोबारियों से हर माह वसूल रहा लाखों रूपये…..

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हल्द्वानी — उत्तराखंड में देसी शराब के कारोबार से जुड़े व्यापारियों में इन दिनों भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। वजह है एक कथित प्रभावशाली व्यक्ति ‘शर्मा’, जो विपक्ष के बड़े नेता का नज़दीकी बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि शर्मा पिछले कुछ महीनों से शराब कारोबारियों से प्रत्‍येक पेटी पर 50 रुपये की अवैध वसूली कर रहा है। यह रकम महीने में लाखों और साल भर में करोड़ों तक पहुंच रही है। इसके बावजूद सिस्टम की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।

हल्द्वानी के कारोबारियों का कहना है कि वसूली की यह व्यवस्था किसी संगठित नेटवर्क की तरह चल रही है। जो व्यापारी पैसे देने से इनकार करते हैं, उनके खिलाफ डराने–धमकाने या अनावश्यक दबाव डालने जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय कारोबारी बताते हैं कि अवैध वसूली का यह खेल अब इतनी मजबूती से जम चुका है कि हर तरफ “शर्मा का डंका” बजता दिखाई दे रहा है। इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदेश में शासन कर रही सरकार भले ही बीजेपी की है, लेकिन हल्द्वानी में शराब कारोबार पर नियंत्रण मानो विपक्ष के खास शर्मा के हाथों में चला गया है। जानकार कहते हैं कि “सरकार का सिस्टम मजबूती की बात करता है, मगर जमीनी स्तर पर अवैध वसूली के खिलाफ कार्रवाई न होने से पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहा है।” इस अवैध वसूली से सबसे ज्यादा प्रभावित स्थानीय शराब कारोबारी हैं। वे बताते हैं कि बढ़ती वसूली के कारण उनका मुनाफा तेजी से घट रहा है और कारोबार घाटे में पहुंचता जा रहा है। कई व्यापारी तो अब उत्तराखंड छोड़कर दूसरे राज्यों में काम शुरू करने की सोच रहे हैं। उनका कहना है कि “सरकार रोजगार और निवेश बढ़ाने की बात करती है, लेकिन दबंगई और राजनीतिक संरक्षण पाए शर्मा की वसूली ने व्यापार करना मुश्किल कर दिया है।” व्यापारियों का यह भी कहना है कि यदि इस अवैध आर्थिक दबाव को जल्द नहीं रोका गया तो राज्य का राजस्व भी प्रभावित होगा और नये निवेशक उत्तराखंड में आने से पीछे हटेंगे। हल्द्वानी के शराब कारोबार पर हो रही इस अवैध वसूली की जांच उच्च स्तर पर कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।प्रदेश में जहां सरकार व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और व्यापार-friendly वातावरण तैयार करने की कोशिश कर रही है, वहीं शर्मा जैसे लोग पूरे सिस्टम पर पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस बढ़ते रोष को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करती है या फिर यह अवैध नेटवर्क यूं ही व्यापारियों का शोषण करता रहेगा।