उत्तराखंड सरकार भले ही गड्ढा मुक्त सड़क अभियान के जरिए सुरक्षित और सुगम यात्रा का भरोसा दे चुकी हो, लेकिन हरिद्वार की हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। यहां एक जर्जर पुल लगातार ओवरलोड और भारी वाहनों के दबाव से टूटन की कगार पर पहुंच चुका है, जिस पर बने गड्ढे संभावित हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। जिन सड़कों और पुलों को वाहनों का भार वर्षों तक झेलना चाहिए था, वे समय से पहले ही थक चुकी हैं, जिससे साफ दिखता है कि ओवरलोडिंग और कमजोर निगरानी व्यवस्था मिलकर आम लोगों की सुरक्षा पर सीधा खतरा बना रही है।
ओवरलोड ट्रैफिक की मार झेलता जर्जर पुल
बैरागी कैंप से जुड़े इस जर्जर पुल पर लगातार भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही चल रही है, जिससे इसकी स्थिति तेजी से खतरनाक होती जा रही है। यह वही मार्ग है, जहां हरिद्वार के बड़े आयोजनों के समय पार्किंग से आने‑जाने वाला अधिकांश ट्रैफिक गुजरता है, इसलिए पुल पर पड़ा अतिरिक्त दबाव इसकी कमजोर संरचना को और नुकसान पहुंचा रहा है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत और लोड कंट्रोल नहीं हुआ, तो एक दिन कोई बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
गड्ढा मुक्त सड़क अभियान के दावों के बावजूद इस पुल पर बने गड्ढे और टूट-फूट प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर रहे हैं। जरूरत है कि हरिद्वार प्रशासन तुरंत तकनीकी जांच कराए, पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करे और मजबूतीकरण या पुनर्निर्माण जैसे कदम उठाए, ताकि बैरागी कैंप से गुजरने वाला पूरा ट्रैफिक सुरक्षित रह सके और किसी संभावित दुर्घटना से पहले ही हालात काबू में किए जा सकें।
