देहरादून। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य की अत्यंत संवेदनशील हिमनद झीलों के वैज्ञानिक अध्ययन की तैयारी पूरी कर ली है। आगामी 8 सितंबर को विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टीम उत्तरकाशी स्थित केदारताल और चमोली स्थित सरस्वती ताल के अध्ययन हेतु रवाना होगी। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने इस अभियान की पुष्टि करते हुए बताया कि इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में आपदा जोखिम को कम करना और पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना है।
इस बहुविषयक दल में बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, वाडिया संस्थान सहित चार प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के भूवैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहेंगे। उत्तराखंड में कुल 13 अति संवेदनशील हिमनद झीलों को चिह्नित किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से इनमें से वसुंधरा समेत चार झीलों का अध्ययन पूर्व में पूरा किया जा चुका है, और अब इसी क्रम में सरस्वती ताल व केदारताल का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
यूएसडीएमए के विशेषज्ञ रोहित कुमार के अनुसार, अध्ययन के दौरान झीलों की सटीक लंबाई, चौड़ाई, गहराई और उनमें मौजूद कुल जलराशि का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही झीलों के आसपास के भू-भाग, चट्टानों की मजबूती और हिमनदों की स्थिति का भी निरीक्षण होगा, ताकि किसी भी संभावित खतरे का पहले से सटीक अनुमान लगाया जा सके।
इस पूरे अध्ययन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। झीलों की गहराई और आंतरिक संरचना को मापने के लिए विशेषज्ञों की टीम मानवरहित बोट और अन्य अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का प्रयोग करेगी। इससे प्राप्त डेटा का उपयोग झीलों का सटीक डिजिटल प्रोफाइल तैयार करने में होगा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यदि सी-डैक संस्था से औपचारिक सहमति मिल जाती है, तो इसी चरण में राज्य की दो और संवेदनशील हिमनद झीलों का भी अध्ययन कराया जाएगा। सरकार की मंशा प्रदेश की सभी 13 संवेदनशील झीलों का वास्तविक समय डेटाबेस तैयार करने की है ताकि भविष्य के खतरों से राज्य को सुरक्षित रखा जा सके।
