उत्तराखंड की सियासत में महिला सम्मान का संवेदनशील मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है, और इसकी मुख्य वजह बना है चकराता का चर्चित ऑडियो विवाद। शुक्रवार को इस मामले में नया मोड़ तब आया जब युवा नेता बॉबी पंवार ने स्थानीय विधायक प्रीतम सिंह और उनके दोनों भाइयों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उनका पुतला दहन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी की गई और प्रीतम सिंह के परिवार पर क्षेत्र में दबंगई चलाने के गंभीर आरोप लगाए गए।
बॉबी पंवार ने प्रदर्शन के दौरान जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आज मामला किसी अन्य के सम्मान से जुड़ा है, लेकिन यदि जनता ने अभी आवाज नहीं उठाई, तो कल उनके अपने परिवार पर भी ऐसी आफत आ सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डर को छोड़कर अपने सम्मान के खातिर एकजुट हों। उनका कहना था कि किसी भी राजनेता या परिवार का रसूख इतना भारी नहीं होना चाहिए कि आम जनता अपने साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ मुंह खोलने से भी डरने लगे।
चकराता के इस ऑडियो कांड ने कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक स्थिति को भी असहज कर दिया है। एक तरफ जहां पार्टी महिलाओं के अधिकारों की पैरोकार होने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ उनके वरिष्ठ नेता पर इस प्रकार के आरोप लगना पार्टी के लिए असहज करने वाला है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि चकराता अब उत्तराखंड की राजनीति का नया अखाड़ा बन चुका है, जहां आने वाले दिनों में आरोप-प्रत्यारोप और विरोध प्रदर्शनों का दौर थमने का नाम नहीं लेगा।


