देहरादून। सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की और प्रदेश के सरकारी व गैर-सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। इस बैठक के फैसलों का सीधा असर राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों और वहां पढ़ रहे लाखों छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा।
मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुसार जल्द से जल्द आधुनिक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ राज्य के विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर की सुविधाओं और आधुनिक पाठ्यक्रम से लैस करना बेहद जरूरी है।
बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को अगले 5 वर्षों का विस्तृत रोडमैप तैयार करने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को NAAC और NIRF एक्रेडिटेशन व रैंकिंग में सुधार पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों को अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक योजनाएं बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समयबद्ध लक्ष्य तय करके ही उच्च शिक्षण संस्थानों की ग्रेडिंग और साख को मजबूत किया जा सकता है।
छात्रों के करियर और रोजगार को ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने छात्र-छात्राओं के लिए एक प्रभावी ट्रेसिंग मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री बांटना काफी नहीं है, बल्कि हर कोर्स के साथ इंटर्नशिप को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाना चाहिए।
छात्रों को व्यावहारिक अनुभव दिलाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों को इंडस्ट्री, गैर-सरकारी संगठनों और सिविल सोसाइटी के साथ तालमेल बढ़ाने की सलाह दी। साथ ही, युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर दिलाने के लिए विश्वविद्यालयों में विदेशी भाषाएं सिखाने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
सचिवालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उच्च शिक्षा सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, अपर सचिव मनुज गोयल, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. दीवान एस. रावत, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, प्रो. एन.के. जोशी और प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट समेत शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
