उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान राज्य की प्रगति को नई गति देते हुए प्रगति पोर्टल के माध्यम से विभिन्न महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक में उन्होंने परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन तथा अन्य महत्वपूर्ण विभागों की लगभग 6,940 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 12 प्रमुख विकास परियोजनाओं की जमीनी स्थिति की विस्तार से जानकारी ली।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि साल 2047 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के बड़े संकल्प को साकार करने के लिए उत्तराखंड का हर विभाग और अधिकारी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे। विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए सीएम धामी ने एक बेहद कड़ा और प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत इन बड़ी परियोजनाओं की मुख्यमंत्री स्तर पर हर महीने और मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक 10 दिनों में अनिवार्य रूप से गहन समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कार्य संस्कृति में सुधार लाने और लेटलतीफी को खत्म करने के लिए अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी होने पर संबंधित विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और नियमानुसार उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उन्होंने एक निश्चित समयसीमा तय करते हुए निर्देश दिया कि जिन भी विकास कार्यों और परियोजनाओं पर 50 प्रतिशत तक का काम पूरा हो चुका है, उन्हें आगामी 15 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में अंतिम रूप दे दिया जाए। इसके अलावा, जिन परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण, वन विभाग की स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा या क्षतिपूर्ति भुगतान जैसी प्रशासनिक रुकावटें आ रही हैं, उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को आपसी तालमेल बिठाकर तुरंत एक्शन लेने को कहा गया है।
सीएम धामी ने जिलाधिकारियों को भी जनपद स्तर के लंबित मामलों की खुद मॉनिटरिंग करने को कहा, क्योंकि चारधाम यात्रा मार्ग, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक महत्व की सड़कें और बिजली-पानी से जुड़ी योजनाएं राज्य के पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार को सीधे बढ़ावा देने वाली हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम सहित तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी जिलाधिकारी मौजूद रहे।
