देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम में बसों की मरम्मत और उनकी जांच करने वाले तकनीकी कर्मियों की भारी कमी बनी हुई है। इस कमी को दूर करने के लिए बीते जुलाई महीने में परिवहन निगम बोर्ड ने 250 कर्मियों की आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती करने की अनुमति दी थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई भर्ती शुरू नहीं हो सकी है।
परिवहन निगम के इस संकट से बेड़े में शामिल लगभग 1,300 बसों की टूट-फूट और खराबी को दुरुस्त करने का काम कार्यशालाओं में बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि रोडवेज़ में तकनीकी कर्मियों के 619 स्वीकृत पद हैं, जिनके सापेक्ष वर्तमान में केवल 54 नियमित कर्मी ही कार्यरत हैं और 565 पद रिक्त चल रहे हैं।
रोडवेज़ को सुचारू रूप से चलाने के लिए तत्काल कम से कम 274 कर्मियों की सख्त आवश्यकता बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए जुलाई में परिवहन निगम की बोर्ड बैठक में 250 तकनीकी कर्मचारियों की आउटसोर्स से भर्ती का फैसला लिया गया था। हालांकि, अभी तक भर्ती प्रक्रिया शुरू होना तो दूर, इसकी औपचारिक शुरुआत भी नहीं हो पाई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण पर फिलहाल शासन स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है।
दूसरी ओर, परिवहन निगम के पास लगभग 200 नई छोटी बसें खरीदने की बड़ी योजना है और आने वाले दिनों में 59 नई बसें बेड़े में शामिल होने वाली हैं। भविष्य में और भी नई बसों की खरीद की जानी है, ऐसे में यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि तकनीकी अमले के बिना इन बसों का रखरखाव कैसे किया जाएगा।
निगम में मैकेनिकल फीटर, टायर निरीक्षक, विद्युत फीटर, हैमर मैन से लेकर सहायक फोरमैन और फोरमैन जैसे तकनीकी पदों पर भारी कमी है। इन महत्वपूर्ण पदों के रिक्त होने से बसों के पुराने से लेकर नए बेड़े की मरम्मत का कार्य बुरी तरह बाधित हो रहा है।
इस गंभीर समस्या पर प्रतिक्रिया देते हुए परिवहन निगम के महाप्रबंधक तकनीकी भूपेश कुशवाहा ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती का प्रस्ताव शासन को पहले ही भेजा जा चुका है। शासन स्तर से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद ही आगे की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।


