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क्या महिला सम्मान सिर्फ एक सियासी हथियार है? भावना पांडे ने कांग्रेस की न्याय यात्रा पर उठाए गंभीर सवाल

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उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों ‘महिला सम्मान’ सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी माहौल के बीच समाजसेवी भावना पांडे ने एक तीखा और स्पष्ट बयान जारी कर कांग्रेस पार्टी और उसकी न्याय यात्रा की कार्यशैली पर गंभीर वैचारिक सवाल खड़े किए हैं। चकराता विधायक प्रीतम सिंह के भाइयों से जुड़े वायरल कथित ऑडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि दूसरों को इंसाफ का पाठ पढ़ाने से पहले कांग्रेस नेताओं को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए।

भावना पांडे ने अपने बयान में कहा कि न्याय और सम्मान की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाली कांग्रेस को सबसे पहले अपने आचरण की कसौटी खुद तय करनी होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी के अपनी ही कार्यकर्ताओं से या वरिष्ठ नेताओं के करीबियों से जुड़े संवेदनशील मामले सामने आते हैं, तब कांग्रेस के नेता चुप्पी क्यों साध लेते हैं? महिला सम्मान जैसे गंभीर मुद्दे पर अलग-अलग और सुविधाजनक पैमाने अपनाना किसी भी राजनीतिक दल की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।

कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि इस वायरल कथित ऑडियो प्रकरण पर उन्हें आगे आकर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए। जब पार्टी सड़क पर उतरकर न्याय मांग रही है, तो जनता यह जानने का पूरा अधिकार रखती है कि इस मामले में उनके अपने विधायक का क्या पक्ष है। पारदर्शिता के बिना कोई भी राजनीतिक आंदोलन जनता का विश्वास नहीं जीत सकता।

कांग्रेस की न्याय यात्रा के तौर-तरीकों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल ऐसी यात्राएं जनहित की कम और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का जरिया ज्यादा बन गई हैं। यात्राओं में केवल गले में मालाएं डालना, भीड़ जुटाना और बड़े नेताओं के नाम के जिंदाबाद के नारे लगाना ही यदि न्याय का पर्याय बन गया है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। न्याय का मार्ग नारों से नहीं, बल्कि नैतिक आचरण और निष्पक्षता से तय होता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को राजनीति का सुविधानुसार इस्तेमाल करने वाला हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। जब तक राजनीतिक दल अपने भीतर झांककर सुधार की पहल नहीं करेंगे, तब तक उनकी किसी भी न्याय यात्रा को जनसमर्थन और विश्वसनीयता मिलना मुश्किल है।

भावना पांडे के इन तीखे सवालों ने उत्तराखंड की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब देखना यह है कि खुद को महिला हितैषी बताने वाली कांग्रेस पार्टी इस वैचारिक और राजनीतिक चुनौती का सामना किस तरह करती है और क्या वह जनता के बीच इन सवालों के संतोषजनक जवाब दे पाती है या नहीं।