केंद्र सरकार उठाएगी जल घटक का 90% खर्च, 6 राज्यों के बीच हुआ समझौता

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना’ को लेकर एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘संवाद से समाधान’ के मंत्र को चरितार्थ करते हुए, केंद्र सरकार ने देशहित में छह प्रमुख राज्यों उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर आम सहमति बना ली है।

इस बहुप्रतीक्षित समझौते के बाद अब किशाऊ परियोजना को अंतिम अनुमोदन के लिए जल्द ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण और संबंधित राज्यों में जल व बिजली की किल्लत को दूर करने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो जाएगा।

बैठक में लिए गए एक बड़े वित्तीय निर्णय के अनुसार, इस विशाल राष्ट्रीय परियोजना के जल घटक के कार्य का 90% खर्च केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा उठाया जाएगा, जबकि शेष 10% का सीमित वित्तीय भार सभी छह राज्यों द्वारा आपस में वहन किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में केन्द्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल के साथ-साथ उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया।

इसके अतिरिक्त केन्द्रीय गृह सचिव, जल शक्ति और विद्युत मंत्रालय के सचिवों सहित उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय व गृह मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस नीतिगत चर्चा में सम्मिलित हुए। यह परियोजना न केवल यमुना के प्रवाह को सुधारेगी, बल्कि आने वाले समय में उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से के सामाजिक-आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।