नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक अहम बैंकिंग अपडेट साझा करते हुए बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को बंद करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया है। केंद्रीय बैंक द्वारा साझा की गई इस आधिकारिक जानकारी से फिनटेक और बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मच गया है।
उच्च न्यायालय ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक की परिसमापन प्रक्रिया को कानूनी रूप से पूरा कराने के लिए पूर्व एसबीआई अधिकारी गिरिकुमार एम. नायर को आधिकारिक परिसमापक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति बैंक के संपत्तियों और देनदारियों के पारदर्शी निस्तारण के लिए की गई है।
अदालत द्वारा नियुक्त किए गए आधिकारिक परिसमापक गिरिकुमार एम. नायर अब बैंक की बंद होने की पूरी प्रक्रिया, वित्तीय खातों की समीक्षा और परिसमापन से जुड़े सभी प्रशासनिक व कानूनी कार्यों की कमान संभालेंगे, ताकि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत पूरी हो सके।
इस पूरी कानूनी कार्रवाई की पृष्ठभूमि नियामक उल्लंघन से जुड़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इससे पूर्व अप्रैल 2026 में नियमाकीय मानकों का लगातार उल्लंघन करने के चलते पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था।
बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद मामला न्यायालय की चौखट तक पहुंचा था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में गहन सुनवाई करते हुए आठ जुलाई और 22 जुलाई को अपने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए थे। इन्हीं अदालती आदेशों के तहत अब पीपीबीएल को पूरी तरह बंद करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
आरबीआई के बयानों के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आठ जुलाई और 22 जुलाई को दिए गए न्यायिक निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करते हुए ही बैंक को बंद करने और लिक्विडेटर की तैनाती करने की यह अंतिम कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
पेटीएम पेमेंट्स बैंक के परिसमापन और इसे पूरी तरह बंद करने के अदालती आदेशों के बीच ग्राहकों और उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि संस्थान से जुड़ी अन्य शेष सेवाएं नियमानुसार लगातार उपलब्ध होती रहेंगी।
अदालत और आरबीआई के इस संयुक्त एक्शन से यह साफ हो गया है कि नियामकीय मानकों के उल्लंघन के मामलों में बैंकिंग क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी और अब लिक्विडेटर की देखरेख में बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
