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8,000 से ज्यादा बिटकॉइन और मनी लॉन्ड्रिंग: डार्क वेब के जरिए नशे का कारोबार करने वाले बनमीत पर ED का शिकंजा

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देहरादून। डार्क वेब के जरिए अमेरिका समेत कई देशों में महंगे नशीले पदार्थों की तस्करी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट पर प्रवर्तन निदेशालय ने शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। देहरादून की PMLA विशेष अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी बनमीत सिंह और उसकी पत्नी अमरप्रीत कौर चावला के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए दोनों को 7 अगस्त को अदालत में पेश होने का समन जारी किया है।

प्रवर्तन निदेशालय की इस बड़ी जांच की शुरुआत अमेरिकी जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और अलर्ट के बाद हुई थी। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी बनमीत सिंह अपने भाई परविंदर सिंह के साथ मिलकर डार्क वेब पर ‘सिंह ऑर्गेनाइजेशन’ नाम से फर्जी नेटवर्क चला रहा था। इस सिंडिकेट ने नशीले पदार्थों की बिक्री से 8,088 से अधिक बिटकॉइन हासिल किए थे। बता दें कि अमेरिकी अदालत बनमीत को ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग में पहले ही सजा सुना चुकी है।

ईडी की जांच में सामने आया कि वर्ष 2012 से 2017 के दौरान आरोपी और उसके परिजनों के भारतीय बैंक खातों में 10.82 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी रकम भेजी गई थी, जिसकी आय का कोई वैध स्रोत नहीं था। इस अवैध कमाई को सफेद करने में आरोपी की पत्नी अमरप्रीत की भी अहम भूमिका पाई गई, जिसने फिक्स डिपॉजिट बनवाने के साथ नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में करोड़ों की संपत्ति खरीदी।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए ईडी इस मामले में अब तक करीब 29.67 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति कुर्क कर चुकी है। इस जब्ती से नशीले पदार्थों के काले कारोबार से खड़े किए गए आर्थिक तंत्र को बड़ा झटका लगा है।

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अमेरिकी कोर्ट से सजा मिलने के बाद भारत में दोबारा मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। हालांकि, देहरादून की विशेष PMLA अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अवैध कमाई का इस्तेमाल और निवेश भारत में किया गया है, इसलिए यह पीएमएलए कानून के तहत एक अलग और स्वतंत्र अपराध है।