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उत्तराखंड के हर सरकारी और निजी ऊंचे भवनों का होगा अनिवार्य फायर सर्वे

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उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड, जिसमें एक इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी, से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार बेहद सतर्क हो गई है और राज्य में सुरक्षा व्यवस्थाओं को पुख्ता करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में मंगलवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान राज्य के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का व्यापक स्तर पर फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्थाओं के मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक के दौरान सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन भी संस्थानों में अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए, जिसके तहत फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों का विशेष रूप से परीक्षण किया जाना अनिवार्य है।

इसी क्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करने और हर सरकारी व निजी मकान का ऑडिट कराने के आदेश दिए हैं, जिसमें विशेष रूप से अधिक ऊंचाई वाले भवनों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, असुरक्षित निकास मार्ग वाले परिसरों और तंग गलियों-रास्तों में बनी इमारतों का अनिवार्य रूप से सर्वे शामिल है।

उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने कार्यालयों-भवनों के सेफ्टी ऑडिट के निर्देश देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर ऑडिट का समय-समय पर कड़ाई से फॉलोअप भी किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को पूरी तरह से रोका जा सके।