Uttarakhand Trekking News: बेदनी-औली बुग्याल में रात्रि प्रवास की अनुमति, SC ने पाबंदियों को बताया अव्यावहारिक

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देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी बुग्यालों में अब पर्यटक और ट्रेकर्स रात के समय विश्राम कर सकेंगे और प्रतिदिन 200 से अधिक की संख्या में भी भ्रमण कर सकेंगे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2018 से लागू तीन प्रमुख प्रतिबंधों को निरस्त किए जाने के बाद उत्तराखंड वन विभाग ने बद्रीनाथ वन प्रभाग से इन पाबंदियों को हटाने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

वन विभाग के इस कदम से राज्य के पर्वतीय पर्यटन, ट्रैकिंग व्यवसाय और स्थानीय रोजगार से जुड़े लोगों को बहुत बड़ी राहत मिली है। मामले की पृष्ठभूमि में औली-बेदनी-बुग्याल संरक्षण समिति चमोली द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2018 को कई कड़े निर्देश दिए थे।

इसमें बुग्यालों में प्रतिदिन पर्यटकों की संख्या केवल 200 तक सीमित करना, रात्रि प्रवास पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और बुग्यालों को राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य घोषित करने पर विचार करने जैसे तीन प्रमुख बिंदु शामिल थे। इन प्रतिबंधों के कारण राज्य में एडवेंचर टूरिज्म और स्थानीय आजीविका पर व्यापक असर पड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशों को बताया अव्यावहारिक

उत्तराखंड सरकार ने हाईकोर्ट के इन निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई के बाद 20 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों पाबंदियों को अव्यावहारिक मानते हुए पूरी तरह निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत के इस फैसले के तुरंत बाद डीएफओ बद्रीनाथ सर्वेश कुमार दुबे ने पाबंदियां हटाने का विभागीय आदेश निर्गत कर दिया है। अब पर्यटकों के लिए प्रतिदिन की संख्या सीमा और नाइट स्टे पर लगी रोक औपचारिक रूप से समाप्त हो गई है।

पर्यावरण संरक्षण के अन्य नियम रहेंगे लागू

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन से जुड़े हाईकोर्ट के अन्य सभी निर्देश यथावत प्रभावी रहेंगे। वन विभाग ने निर्देश दिया है कि बुग्यालों में पर्यटन गतिविधियों के संचालन के दौरान कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक नियंत्रण और प्राकृतिक वनस्पतियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उत्तराखंड के ट्रैकिंग गाइडों, पोर्टरों, होमस्टे संचालकों और टूर एजेंसियों में भारी उत्साह है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि बुग्यालों में रात्रि प्रवास की अनुमति मिलने से लंबी दूरी के हिमालयी ट्रेक्स में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे राज्य की पर्वतीय अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्वरोजगार को एक नई दिशा मिलेगी।