ऋषिकेश। एम्स अस्पताल में यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे आपातकालीन चिकित्सा और कानूनी सलाह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर की शुरुआत की गई। इस नई व्यवस्था से हिंसा की शिकार महिलाओं को तुरंत इलाज, मेडिको-लीगल जांच और काउंसलिंग के लिए अलग-अलग जगह नहीं भटकना पड़ेगा।
अस्पताल भवन की तीसरी मंजिल पर प्रसूति एवं स्त्री रोग वार्ड के सामने इस सेंटर का आधिकारिक उद्घाटन किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने राज्य महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल और एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह की मौजूदगी में किया।
उद्घाटन के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष विजया राहटकर ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और अपराधों से निपटने के लिए देशभर में वन स्टॉप सेंटरों की स्थापना को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह सेंटर पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय और आपातकालीन चिकित्सा सहायता दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि यह सेंटर पूरी गोपनीयता बनाए रखते हुए पीड़ितों को सुरक्षित, निजी और सम्मानजनक माहौल देगा। उन्होंने कहा कि सेंटर में मेडिको-लीगल जांच के साथ-साथ आपातकालीन चिकित्सा देखभाल की सभी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराई गई हैं।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. जया चतुर्वेदी ने बताया कि यह वन स्टॉप सेंटर मल्टी-डिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) मॉडल पर काम करेगा। इस व्यवस्था से पीड़ितों को अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और सभी जरूरी प्रक्रियाएं एक ही स्थान पर पूरी हो सकेंगी।
