उत्तराखंड राज्योत्सव के भव्य मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुशासन, कड़े कानूनों, पारदर्शिता और सामाजिक सुधारों के मोर्चे पर सरकार की बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के दूरदर्शी विजन से राज्य की शासन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं और कई मामलों में उत्तराखंड पूरे देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।
सामाजिक सुधारों का विशेष और प्रमुख जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता को देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर ही लागू किया गया है, जो सामाजिक समरसता की दिशा में मील का पत्थर है। इसके साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को और अधिक समावेशी, आधुनिक व प्रभावी बनाने के लिए पुराने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है, ताकि राज्य के सभी बच्चों को आधुनिक और देश की मुख्यधारा की उच्चस्तरीय शिक्षा मिल सके।
युवाओं के भविष्य और अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर बात करते हुए उन्होंने देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून का विशेष हवाला दिया। सीएम धामी ने कहा कि सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए नकल माफिया को जेल की सलाखों के पीछे भेजा है और बिना किसी भ्रष्टाचार या पर्ची-खर्ची के 35,000 से अधिक योग्य युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां दी हैं।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि केंद्र के सहयोग से ही राज्य में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेश में चहुंमुखी विकास और सामाजिक सद्भाव को निरंतर बनाए रखने का अपना कड़ा और दृढ़ संकल्प दोहराया, जिससे राज्य का भविष्य और अधिक उज्जवल हो सके।


