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कच्चा तेल हुआ सस्ता पर भारतीय तेल कंपनियों की मजबूरी; जानिए आपके शहर में कब तक घटेंगे ईंधन के दाम

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद घरेलू बाजार में आम उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर ईंधन पाने के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने में अभी करीब दो महीने का समय और लग सकता है। वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे पहुंचने के बाद भी तुरंत कटौती न होने के पीछे उन्होंने तेल कंपनियों के पुराने स्टॉक और पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभाव को मुख्य वजह बताया है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारतीय पेट्रोलियम कंपनियां वर्तमान में उस कच्चे तेल को प्रोसेसिंग कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम पर होने के दौरान ऊंचे दामों में खरीदा गया था। इस महंगे कच्चे तेल की खरीद के कारण वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यही वजह है कि पुराना महंगा स्टॉक खत्म होने और घाटे की भरपाई के बिना तुरंत कीमतें घटाना संभव नहीं है।

वैश्विक बाजार के मुकाबले भारत में कम बढ़े दाम

केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल के बावजूद भारत में दूसरे देशों के मुकाबले पेट्रोल और डीजल के दाम बहुत कम बढ़े हैं। वर्ष 2022 में देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं, जून 26 को यह दाम 102.12 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया, जिसका अर्थ यह है कि पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 फीसदी का ही इजाफा हुआ है।

पुरी ने वैश्विक स्तर पर तेल की महंगाई का तुलनात्मक विवरण देते हुए बताया कि जहां विकसित देशों में औसतन ईंधन के दामों में करीब 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं भारत के पड़ोसी देशों में यह बढ़ोतरी लगभग 35 फीसदी के पार रही है। उदाहरण के तौर पर फ्रांस में पेट्रोल की कीमतों में 17.74 फीसदी, जर्मनी में 19.05 फीसदी और इटली में 18.59 फीसदी की बढ़त हुई है, जबकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान में पेट्रोल के दामों में 39.77 प्रतिशत का रिकॉर्ड इजाफा देखा गया है।

HPCL राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन

देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आने वाले समय में आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार जुलाई को HPCL की राजस्थान रिफाइनरी का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना देश की पेट्रोलियम क्षमताओं को बढ़ाने में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मेगा प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 80 हजार करोड़ रुपये की विशाल लागत से इस अत्याधुनिक ग्रीन फील्ड रिफाइनरी का निर्माण किया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस रिफाइनरी के पूरी तरह चालू हो जाने से न केवल देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि आने वाले समय में देश के भीतर ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति भी पूरी तरह सुनिश्चित की जा सकेगी।