देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार आगामी 4 जुलाई से लेकर 18 जुलाई तक पूरे प्रदेश में 15 दिवसीय ‘सेवा पखवाड़ा’ महा-अभियान चलाने जा रही है। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” नीति के दूसरे चरण के तहत आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के दौरान राज्य के सभी जिलों, ब्लॉकों और तहसील स्तर पर विशेष बहुद्देशीय शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी खुद जनता के बीच पहुंचेंगे, जहां मौके पर ही स्थानीय समस्याओं का निपटारा किया जाएगा और पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सौंपा जाएगा।
इस बड़े प्रशासनिक अभियान को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में सभी विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस पखवाड़े को पूरी तरह समयबद्ध, पारदर्शी और व्यापक जनभागीदारी के साथ जमीन पर उतारा जाए।
मुख्यमंत्री के 5 वर्ष पूरे होने पर ‘सेवा, सुशासन और समर्पण’
यह विशेष अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। सरकार इस बार इसे ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ थीम पर चला रही है। इस दौरान स्वास्थ्य, राजस्व, समाज कल्याण और कृषि जैसे प्रमुख विभाग ग्रामीण और अर्ध-शहरी स्तर पर अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं का न केवल प्रचार करेंगे, बल्कि वंचित रह गए पात्र नागरिकों को तुरंत ऑन-स्पॉट योजनाओं से आच्छादित करेंगे।
इन बहुद्देशीय शिविरों का मुख्य फोकस जनता की उन शिकायतों को दूर करना है जो लंबे समय से लटकी हुई हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि ग्रामीणों को छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों, पेंशन योजनाओं या राजस्व संबंधी मामलों के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
इन जगहों पर दोबारा नहीं लगेंगे शिविर
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जिला प्रशासन को एक महत्वपूर्ण तकनीकी निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अभियान के पहले चरण में जिन दूरस्थ या चिन्हित स्थानों पर पहले से बहुद्देशीय शिविरों का आयोजन किया जा चुका है, उन विशिष्ट गांवों या क्षेत्रों में इस बार दोबारा शिविर नहीं लगाए जाएंगे।
इस नीति के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के नए और अब तक अछूते रह गए सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को भी इस अभियान का समान रूप से पूरा लाभ मिल सके। मुख्य सचिव ने साफ लहजे में कहा है कि पूरे 15 दिनों की मॉनिटरिंग शासन स्तर से सीधे की जाएगी, ताकि सुशासन का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक निर्बाध रूप से पहुंच सके।
