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हरिद्वार अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाला: बयानों के लिए पुलिस बुलाएगी संस्थान प्रबंधक, न आने पर सख्त कार्रवाई

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हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में सामने आए चर्चित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच दल ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कांवड़ मेला संपन्न होने के तुरंत बाद एसआईटी ने मामले में नामजद 19 शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों और संचालकों को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। एसआईटी ने सभी संचालकों को संबंधित थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।

पुलिस विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला बीते 13 जुलाई को सामने आया था। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से हरिद्वार के 19 शिक्षण संस्थानों के खिलाफ छात्रवृत्ति में भारी वित्तीय धांधली और फर्जीवाड़े के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद से ही पुलिस प्रशासन इस मामले की बारीकी से पड़ताल में जुटा हुआ है।

दर्ज मामले के मुताबिक, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के गहन विश्लेषण और सत्यापन में इन सभी 19 संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। जांच में पाया गया कि इन शिक्षण संस्थानों ने छात्रवृत्ति योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की, फर्जी दस्तावेज तैयार किए और शासकीय धन का गबन किया।

इस बड़े और बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की निष्पक्ष व निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने एसआईटी का गठन किया था। कांवड़ मेले की व्यस्तता के समाप्त होते ही एसआईटी ने इस केस की फाइल दोबारा खोलकर जांच प्रक्रिया की रफ्तार बढ़ा दी है।

कार्रवाई के पहले चरण में एसआईटी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से इन सभी 19 संदिग्ध शिक्षण संस्थानों से जुड़े मूल दस्तावेज, आवेदन पत्र और बैंक खातों के ब्योरे तलब किए थे। विभागीय कागजातों की जांच पूरी होने के बाद अब दूसरे चरण में एसआईटी ने संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों से सीधे आमने-सामने पूछताछ की तैयारी की है।

एसआईटी की जांच टीम ने नोटिस प्राप्त करने वाले सभी 19 संस्थानों के संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करें। एसआईटी अधिकारियों ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि कोई संचालक तय समय पर बयान दर्ज कराने में टालमटोल करता है या जांच में सहयोग नहीं करता है, तो उसके खिलाफ विधि अनुसार सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।