देहरादून। उत्तराखंड में सुगंधित फसलों के उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य में पहली बार ‘महक क्रांति नीति’ लागू की है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य एरोमा खेती (सुगंधित पौधों की खेती) का बड़े पैमाने पर विस्तार करना है।
वर्तमान में राज्य के भीतर लगभग 29 हजार से अधिक किसान पहले से ही लेमनग्रास, लैवेंडर, रोजमेरी, डेमस्क रोज, पुदीना और गेंदे जैसी विभिन्न प्रकार की सुगंधित फसलों की खेती में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं, जिन पर इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर पड़ेगा।
प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड में ‘Aroma Farming in Uttarakhand’ के चहुंमुखी विकास के लिए आगामी 25 वर्षों यानी वर्ष 2037 तक की अवधि का एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इसी दीर्घकालिक योजना के अंतर्गत पहली बार राज्य में महक क्रांति नीति को धरातल पर उतारा गया है, जिसके तहत साल 2037 तक प्रदेश के कुल 91 लाख किसानों को इस बड़े एरोमा नेटवर्क से जोड़ने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश की 22,750 हेक्टेयर भूमि को चिन्हित किया गया है, जिस पर कुल सात विशिष्ट ‘Aroma Valleys Uttarakhand’ विकसित की जा रही हैं। इन वैलियों के माध्यम से स्थानीय किसानों को सीधे तौर पर एरोमा खेती से जोड़ा जाएगा और सुगंधित उत्पादों के वैल्यू एडिशन के लिए क्षेत्र में ही विशेष प्रसंस्करण फैक्ट्रियां भी स्थापित की जाएंगी।
सुगंधित तेलों की शुद्धता बनाए रखने और मिलावट की सटीक जांच के लिए सरकार बड़ा कदम उठा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 20 करोड़ रुपये की लागत से एक ‘एक्सीलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री’ सुविधा स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसका विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है।
काश्तकारों की सहूलियत के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कुल छह सैटेलाइट केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। ये सभी केंद्र स्थानीय स्तर पर किसानों को उच्च गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, आधुनिक प्रसंस्करण सुविधा, तकनीकी प्रशिक्षण और उनके उत्पादों के लिए उचित बाजार उपलब्ध कराएंगे। इसके अतिरिक्त, परफ्यूमरी उद्योग से संबंधित एक विशेष प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी संचालित किया जाएगा।
राज्य में एरोमा टूरिज्म को तेजी से बढ़ावा देने के लिए इन सैटेलाइट केंद्रों पर सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही प्रदेश के अत्यंत दूरस्थ एवं पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को उनके गांव के पास ही आसवन और प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा ‘मोबाइल आसवन संयंत्र’ भी संचालित किए जाएंगे। ये सचल संयंत्र सीधे खेतों के करीब जाकर फसलों से तेल निकालने का काम सुगम बनाएंगे।
उत्तराखंड में सुगंधित फसलों की पारंपरिक और आधुनिक खेती न केवल आर्थिक विकास का माध्यम बन रही है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाने का एक बड़ा संवाहक भी साबित हो रही है। राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक प्रदेश के किसानों के बढ़ते रुझान की बदौलत ही एरोमा क्षेत्र में राज्य का कुल कारोबारी टर्नओवर कभी महज एक करोड़ रुपये हुआ करता था, जो अब रिकॉर्ड तोड़ छलांग लगाते हुए सीधे 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
भौगोलिक दृष्टि से समृद्ध जैव-विविधता से संपन्न उत्तराखंड प्राचीन काल से ही बहुमूल्य औषधीय और अनूठे सुगंधित पौधों की अपार संपदा के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। इसी ऐतिहासिक महत्ता को पुनर्जीवित करने के लिए संबंधित संस्थान ने किसानों को व्यावहारिक रूप से एरोमा खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सुगंधित फसलों के जीवंत प्रदर्शन और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विधिवत शुरुआत की है।
इस योजना के अगले चरण में संस्थान द्वारा कुल 7.5 एकड़ भूमि को पूरी तरह समतल कर उस पर लेमनग्रास, डेमस्क रोज गुलाब और पुदीना जैसे अत्यंत मांग वाले सुगंधित पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण कार्य संपन्न किया गया है। इसके साथ ही, केंद्र ने अपने ‘Selaqui Aroma Park’ में विभिन्न उत्पादन क्षमताओं वाले अत्याधुनिक आसवन संयंत्रों की स्थापना भी पूरी कर ली है, ताकि स्थानीय किसानों को समय पर और बिना किसी बाधा के बेहतरीन प्रसंस्करण सुविधा मिल सके।
