Headlines

बिना स्वीकृत पदों के आबकारी विभाग में उर्दू अनुवादकों की भर्ती पर विवाद, ‘नौकरी जिहाद’ के आरोपों से गरमाई सियासत

खबर शेयर करें -

उत्तराखंड में भू-कानून और अन्य संवेदनशील विषयों पर कड़ा रुख अपनाने वाली पुष्कर सिंह धामी सरकार के समक्ष अब एक नया प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। सूबे के जाने-माने सूचना का अधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता विकेश नेगी ने पुलिस, जिला प्रशासन और विशेषकर आबकारी विभाग में उर्दू अनुवादकों की नियुक्तियों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है।

उन्होंने इस पूरे प्रकरण को कथित तौर पर “नौकरी जिहाद” का नाम दिया है। विकेश नेगी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जुटाई गई आधिकारिक जानकारियों में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के हवाले से नेगी ने आरोप लगाया है कि शासन स्तर से इन विभागों में उर्दू अनुवादकों के लिए कोई भी नियमित या वैध पद स्वीकृत ही नहीं किया गया था। इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर न केवल नियुक्तियां की गईं, बल्कि कई लोग वर्षों से इन पदों पर निर्बाध रूप से अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा उंगलियां आबकारी विभाग की भूमिका पर उठ रही हैं, जहां बिना किसी स्वीकृत पद के कर्मचारियों को तैनात रखा गया और उन्हें नियमित रूप से सरकारी कोष से वेतन का भुगतान भी किया जाता रहा। आरटीआई कार्यकर्ता का स्पष्ट कहना है कि यह केवल एक मामूली क्लैरिकल गलती नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के पूरे भर्ती ढांचे और कार्मिक तंत्र की एक बहुत बड़ी नाकामी को दर्शाता है।

यही कारण है कि यह कानूनी पचड़े में फंसकर अब न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। एक तरफ जहां राज्य के लाखों बेरोजगार युवा नौकरियों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिना किसी ठोस नियमावली और प्रशासनिक आधार के गुपचुप तरीके से पद बांटना सरकार की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस बड़े खुलासे के बाद से आबकारी महकमे और शासन के संबंधित अधिकारियों के बीच खलबली मची हुई है, क्योंकि यह विभाग पहले भी कई तरह के नीतिगत और प्रशासनिक विवादों के कारण विवादों के घेरे में रहा है। विकेश नेगी ने मुख्यमंत्री धामी से इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है, ताकि उन चेहरों को बेनकाब किया जा सके जिनकी शह और सिफारिशों पर ये संदिग्ध नियुक्तियां की गईं।

फिलहाल, राजनीतिक और नौकरशाही के गलियारों में इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ चुकी है, जहां विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है, वहीं आम जनता भी यह देखने के लिए उत्सुक है कि क्या धामी सरकार इस कथित ‘नौकरी जिहाद’ के दोषियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई करेगी या फिर यह फाइल भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दी जाएगी।